Wednesday, May 20, 2020

कोरोना काल के सामाजिक सरोकार

                         राम जाने 



रिश्तों के मायने; 
सामाजिक ताने-बानें;        
जब-तब मिलने;
दिल खोल कर बतियानें;
पुराने दिनों की यादों के 
पंख पर बैठ; 
स्मृतियों की कोठारी में से,
बहुत कुछ ढूँढ लाने;
फिर;
एक-एक याद पर  
घंटों बैठ जुगाली 
करने और कराने;
यारों की महफिल में,
यादों की बारात सजाने;
उनके उलझे ताने -बाने सुलझाने;
वक्त बे वक्त कहीं आने व जाने;
अपनों के काम में हाथ बटाने ;
दूसरों के गम को अपना बनाने ;
अब हमें कहाँ जाने ?
अपने ही घर में बैठ, 
समय है बिताने;
चाह कर भी 
दूसरों के काम,
हमें अब न आनें!
पहले वाले दिन,
अब कब आने ?
राम जाने-राम जाने -2 | 
              
            रविशंकर उपाध्याय 

मौलिक कृति एवं 
सर्वाधिकार सुरक्षित | 

1 comment:

  1. Nice description of the unprecedented social aloofness resulting from Corona pandemic.

    ReplyDelete