Tuesday, May 26, 2020

कोरोना काल के उत्परिवर्तन

               उत्परिवर्तन







समय चक्र ने करवट ली है, 
उलट-पुलट मचा है भारी;
सब कुछ देखो बदल रहा है,
उत्परिवर्तन है जारी | 

सालों से संचित निधियाँ, 
दुनियाँ भर की संस्कृतियाँ; 
विकासवाद भी झूठा हो गया,
उत्परिवर्तन है जारी | 

स्मृतियों में अंकित नियम,
धर्म की सब परिभाषा; 
देखते-देखते बदल रहे हैं;
उत्परिवर्तन है जारी | 

मंदिर-मस्जिद बंद पड़े हैं;
अब खुद में मंदिर-मस्जिद;
अपने अंदर झाँको घर में;
उत्परिवर्तन है जारी |

शादी के सब ताम-झाम,
अब सपनों में ही होगा;
दिल से दिल मिल जाना शादी ;
उत्परिवर्तन है जारी | 

त्योहारों में मिलना-जुलना,
बीती बात पुरानी है;
बना-बना खुद व्यंजन खाना,
उत्परिवर्तन है जारी | 

अगर कभी सड़कों पर मिल गये;
आपस में अब गले न मिलना;
हाथ जोड़ कर रस्म निभाना,
उत्परिवर्तन है जारी | 

बच्चों की शिक्षा भी दूर से;
पास बैठकर शिक्षा पाना;
दिवा-स्वप्न बन गया आज कल;
उत्परिवर्तन है जारी | 

रोज-रोज आफिस को जाना;
यह दस्तूर पुराना है,
घर ही से अब काम है करना;
उत्परिवर्तन है जारी | 

बात-बात पर मार्केट जाना;
अब पड़ जायेगा भारी;
कभी-कभी बाजार में जाना;
उत्परिवर्तन है जारी | 

नदियों में जाकर के नहाना;
तीज और त्योहारों पर;
ना-ना ऐसा अब मत करना;
उत्परिवर्तन है जारी | 
                                                                                  
बच्चों को अब मत ले जाना;
पार्क और मैदानों में; 
उनको घर में खेल खिलाना;
उत्परिवर्तन है जारी | 

अंत काल में साथ निभाने,
मुक्तिधाम तक मत जाना;
दूर ही से शीश झुकाना;
उत्परिवर्तन है जारी-2 | 

             रविशंकर उपाध्याय 

मौलिक कृति एवं 
सर्वाधिकार सुरक्षित | 






9 comments:

  1. अति उत्तम रचना कवि महोदय ।कोरोना काल से होने वाले परिवर्तनों के प्रति आशावादी दृष्टिकोण ।

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  2. Bahut sundar. Vyaktitwa & yogyata ke anuroop nirmit rachna.

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  3. बहुत बहुत धन्यवाद सर ।आपके इस उत्साहवर्धन के लिए ।

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  4. Bahut hi sunder sir. Kam shabdon me utparivartan ka samagra chitran. Bahut khoob.

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद ।

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  5. Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद सतीश ।

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