Monday, June 8, 2020

शहीद

                          शहीद 








तुम देशप्रेम के चरम बिंदु,
निज देश के हित सर्वस्व त्याग, 
तुम परम धाम को चले गये; 
हे परम वीर तुमको सलाम| 
  
तुम अंत समय तक भिड़े रहे, 
शत्रु पक्ष की कमर तोड़, 
इह लोक छोड़ सुरधाम गये; 
हे परम वीर तुमको सलाम|  

दुश्मन से देश की रक्षा का, 
दिल में लिये संकल्प तुम, 
सर में अपने कफन बाँध; 
हे परम वीर तुमको सलाम|   

अपनों की चिंता चित में न ला, 
हाथों में अपने हथियार लिये, 
तुम शत्रु पक्ष पर झपट पड़े; 
हे परम वीर तुमको सलाम|  

कर सेना उनकी तहस-नहस, 
शेरों जैसे आगे बढ़, 
मरते दम तक लड़ते ही रहे; 
हे परम वीर तुमको सलाम|  


करके हमें निश्चिंत तुम, कि 
हम सुरक्षित घरों में हैं, 
तुम भिड़ रहे रणों में थे; 
हे परम वीर तुमको सलाम|  

तुम खून अपना बहा-बहा,
सीमाओं पर डटे रहे; 
नित नए संकट आते रहे, 
तुम हर समय सहते रहे,  
अंत में फिर त्याग सब, 
तुम परम धाम को चले गये; 
हे परम वीर तुमको सलाम|  

तुम मर मिटे इस देश पर, 
इस देश की आन पर, 
इस देश की पहचान पर; 
हे परम वीर तुमको सलाम|  

जब तक रही निज देह में, 
खून की एक बूँद भी, 
तुम भिड़े रहे रण क्षेत्र में;
हे परम वीर तुमको सलाम|  

शत्रु के छक्के छुड़ा, 
उनको पीछे ठेल कर, 
तुम चल दिये निज धाम को; 
हे परम वीर तुमको सलाम|  

तुम देश के सिर-मौर हो, 
तुम देश के गौरवमयी 
इतिहास के युवराज हो, 
तुम थे तो हम हैं आज खुश, 
तुम बना गये हमको ऋणी;  
कर-बद्ध हो निज सिर झुका, 
हम सब विनम्र भाव से, 
करते सदा तुमको प्रणाम;  
हे परम वीर तुमको सलाम-2 | 
                        
                     रविशंकर उपाध्याय 

मौलिक कृति एवं 
सर्वाधिकार सुरक्षित | 

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