Friday, June 5, 2020

कोरोना काल में कुछ लोग

    

                            लोग



बड़े-बड़े भाषण देते, 
खुद उस पर अमल न करते, 
गली ,मोहल्ला या सड़कों पर, 
मिल जायेंगे हम सबको, 
ऐसे -ऐसे लोग !

सटकर ही बतियायेंगे, 
आपस में दूरी रखना,
यदि उनको बतलाओ तो;
मार-पीट पर उतर आयेंगे,
ऐसे -ऐसे लोग !

सब नियम-कानून जानते, 
साफ-सफाई हर दम रखना, 
हाथों को हरदम धोना, 
मल-मलकर  साबुन से धोना; 
फिर भी उस पर अमल न करते, 
चलते -फिरते वायरस वाहक, 
हमको,आपको,सब लोगों को; 
मिल जायेंगे सभी जगह; 
ऐसे -ऐसे लोग !

बिना काम के कभी न निकलें, 
दुकानों या बाजारों में, 
जब तक बहुत जरुरी न हो, 
घर के बाहर न निकलें; 
बिना काम के घूमने वाले, 
पान -सुपारी खानें वाले, 
बिन पूछे समझाने वाले, 
खुद कुछ भी अमल न करते; 
ऐसे -ऐसे लोग !

हलके में वायरस को लेते, 
सरकारों की सारी बातें, 
उनकी सभी हिदायतें, 
ताख पर रखकर चल देते हैं; 
ऐसे -ऐसे लोग !

दुनियाँ भर की सारी बातें, 
दुखते दिन और दुखती रातें, 
पूरी दुनियाँ दहल रही है, 
मौत भयानक टहल रही है, 
एक-एक को सूँघ रही है, 
सारे मीडिया या कि अखबार, 
सबमें बस एक ही समाचार, 
इतने मर गये ,इतने संक्रमित; 
भविष्य और भयावह होगा, 
सबको देते चेतावनी; 
सबको है रखना सावधानी, 
तभी हमारा जीवन होगा, 
हम सारे के सारे होंगे, 
नहीं तो दुनियाँ दहल जायेगी, 
इतनी सारी मौतें होंगी; 
इतना सब कुछ जान रहे हैं, 
फिर भी आँखे नहीं खोलते, 
कहीं भी देखो मिल जायेंगे; 
ऐसे -ऐसे लोग !

अब भी सब आँखे खोलें,  
केवल अपना ख्याल करें,  
समय -समय पर हाथ धुलें,  
बहुत जरुरी जब तक न हो, 
घर से बाहर न निकलें;  
आपस में दूरी रखें,  
सरकारों की राय सुनें,  
इस वायरस से बचने का, 
उनसे इसका उपाय सुनें,  
उनके पास विशेषज्ञ बड़े हैं, 
इस वायरस से लड़ने को, 
उनके पास चिकित्सक हैं; 
बहुत देर अब भी न हुई है, 
आओ हम सब मिल-जुल कर, 
अपने इस सन्युक्त प्रयास से, 
कोरोना को दूर भगायें, 
अपने देश और दुनियाँ को, 
पहले जैसा खुशहाल बनायें, 
जिससे फिर से आपस में मिल-जुल, 
सारे ही त्यौहार मनायें -2 |  


                    रविशंकर उपाध्याय 

मौलिक कृति एवं 
सर्वाधिकार सुरक्षित | 

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