Saturday, June 27, 2020

नींद

                               नींद



विश्वव्यापी महामारी, 
दुनियाभर की बेरोजगारी, 
पूरी दुनिया परेशान है; 
नींद नहीं है उसको आती|  
 
दुःख से सब बेहाल हो रहे, 
तड़प-तड़प कर रोज मर रहे, 
देख दशा दुनिया की अपने; 
नींद नहीं है उसको आती|  
 
चूसना खून गरीबों का, 
निजी अस्पताल में जारी; 
सरकारी अस्पताल अव्यवस्थित; 
नींद नहीं है उसको आती|  
 
बच्चे घर में सब अपने हैं, 
विद्यालय सब बंद पड़े हैं, 
शिक्षा से मरहूम नौनिहाल; 
नींद नहीं है उसको आती|  
 
कल कारखानों में ताले लटके, 
मजदूर सड़कों पर भटके, 
उत्पादन सब ठप्प पड़ा है; 
नींद नहीं है उसको आती|  
 
गरीबों की न कोई सुनता, 
खुद के गम से परेशान सब;
परोपकार की भावना मृतप्राय; 
नींद नहीं है उसको आती|  
 
सरकारें सब हार चुकी हैं,
सारे जतन हुयेअसफल हैं; 
रोज हजारों मरीज बढ़ रहे;
नींद नहीं है उसको आती|  
 
गाँवों पर दबाव बढ़ रहा, 
सब परदेशी गाँवों में हैं, 
कैसे सबका काम चलेगा?  
नींद नहीं है उसको आती|  
 
खेतों की अपनी क्षमता है, 
कैसे इतना अन्न उगाये? 
कैसे सबका पेट भरेगा?
नींद नहीं है उसको आती|  
 
दुनिया में हा-हाकार मचा है, 
रोग,गरीबी और भुखमरी, 
भ्रष्टाचार हर तरफ मचा है; 
नींद नहीं है उसको आती|  
 
कैसे इस चक्रव्यूह से निकले? 
कैसे इस संकट से उबरे? 
यही सोचते जाग रहा है; 
नींद नही है उसको आती|  
 
हम उबरे थे,हम उबरेंगे;
अपना पिछला इतिहास बताता; 
मानव की जिजीविषा प्रबल है; 
हर संकट से हम निकलेंगे|  

इसी प्रबल विश्वास को लेकर, 
सपनों की गोदी में जाता, 
खुशहाल जगत के सपनें लेकर; 
मीठी नींद में वह सो जाता-2|    

                             रविशंकर उपाध्याय 

मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित| 

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