शहीद
तुम देशप्रेम के चरम बिंदु,
निज देश के हित सर्वस्व त्याग, तुम परम धाम को चले गये;
हे परम वीर तुमको सलाम|
तुम अंत समय तक भिड़े रहे,
शत्रु पक्ष की कमर तोड़,
इह लोक छोड़ सुरधाम गये;
हे परम वीर तुमको सलाम|
दुश्मन से देश की रक्षा का,
दिल में लिये संकल्प तुम,
सर में अपने कफन बाँध;
हे परम वीर तुमको सलाम|
अपनों की चिंता चित में न ला,
हाथों में अपने हथियार लिये,
तुम शत्रु पक्ष पर झपट पड़े;
हे परम वीर तुमको सलाम|
कर सेना उनकी तहस-नहस,
शेरों जैसे आगे बढ़,
मरते दम तक लड़ते ही रहे;
हे परम वीर तुमको सलाम|
करके हमें निश्चिंत तुम, कि
हम सुरक्षित घरों में हैं,
तुम भिड़ रहे रणों में थे;
हे परम वीर तुमको सलाम|
तुम खून अपना बहा-बहा,
सीमाओं पर डटे रहे;
नित नए संकट आते रहे,
तुम हर समय सहते रहे,
अंत में फिर त्याग सब,
तुम परम धाम को चले गये;
हे परम वीर तुमको सलाम|
तुम मर मिटे इस देश पर,
इस देश की आन पर,
इस देश की पहचान पर;
हे परम वीर तुमको सलाम|
जब तक रही निज देह में,
खून की एक बूँद भी,
तुम भिड़े रहे रण क्षेत्र में;
हे परम वीर तुमको सलाम|
शत्रु के छक्के छुड़ा,
उनको पीछे ठेल कर,
तुम चल दिये निज धाम को;
हे परम वीर तुमको सलाम|
तुम देश के सिर-मौर हो,
तुम देश के गौरवमयी
इतिहास के युवराज हो,
तुम थे तो हम हैं आज खुश,
तुम बना गये हमको ऋणी;
कर-बद्ध हो निज सिर झुका,
हम सब विनम्र भाव से,
करते सदा तुमको प्रणाम;
हे परम वीर तुमको सलाम-2 |
रविशंकर उपाध्याय
मौलिक कृति एवं
सर्वाधिकार सुरक्षित |
Very nice & emotional poem! Great tribute to martyrs...🙏🙏
ReplyDeleteThank you very much.
ReplyDeleteEs kavita ka Chinese anuvad hona chahiye aur china bhejna chahiye taki Chinese ko bhi Bhartiya sena ki veer gathao ka pata chale
ReplyDeleteThank you Pramod.
ReplyDeleteHeart touching.Jai Hind
ReplyDeleteVery well written Sir.
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