धन-धान्य से देश भरा है,
हर तरफ खुशहाली है,
हर कोई खुश अपने में है;
एक दिन मैंने सपना देखा|
जाति-धर्म पर कोई न लड़ता,
स्वार्थसिद्धि में कोई न पड़ता,
सब मिल-जुल कर आपस में रहते;
एक दिन मैंने सपना देखा|
फसलों से सब खेत भरे हैं,
उच्च कोटि के बीज पड़े हैं,
खेतों में सोना उगता है;
एक दिन मैंने सपना देखा|
ऊँच-नीच की बात न कोई,
बैर-भाव न रखता कोई,
मेल-जोल की गंगा बहती;
एक दिन मैंने सपना देखा|
सही समय पर शिक्षा मिलती,
एक-एक को शिक्षा मिलती,
अब न कोई अशिक्षित है;
एक दिन मैंने सपना देखा|
सबको ही रोजगार मिल रहा,
उनकी शिक्षा के अनुसार,
अब न कोई बेरोजगार यहाँ;
एक दिन मैंने सपना देखा|
बच्चे कम अब परिवारों में,
स्वस्थ और हैं मस्त घरों में,
कोई न बचा कुपोषित है;
एक दिन मैंने सपना देखा|
होली और ईद मनाते,
त्योहारों पर मिलने जाते,
आपस में न कोई लड़ाई;
एक दिन मैंने सपना देखा|
सुख-दुःख में सब साथ में रहते,
छोटे-बड़े का भाव न रखते,
दुःख में अपनों के हाथ बटाते;
एक दिन मैंने सपना देखा|
दादा-दादी,ताऊ-चाची,
सब मिल एक आँगन में रहते,
परिवारों में तैरती खुशियाँ;
एक दिन मैंने सपना देखा|
गाँव में ही रोजगार मिल रहा,
दिल्ली,मुंबई कोई न जाता,
बड़े न अब एकाकी रहते,
अवसादों में कभी न पड़ते,
चेहरे पर रहती मुस्कान;
एक दिन मैंने सपना देखा|
बच्चे हरदम ही रहते
अपने दादा-दादी के साथ,
उन्हें कहानी कई सुनाते
दादा बड़े चाव के साथ,
जिनमें झलके जीवन दर्पण,
जीवन जीने का दर्शन,
बच्चे खूब मजे से सुनते
उनकी छोटी-छोटी बात;
एक दिन मैंने सपना देखा|
काश! ये सपना सच हो जाता,
आने वाले समय काल में;
विपदा के दिन जल्दी बीते,
सूर्य उगे फिर से खुशियों का,
चीर सभी गम के अँधियार;
एक दिन मैंने सपना देखा-2 |
रविशंकर उपाध्याय
मौलिक कृति एवं
सर्वाधिकार सुरक्षित |

आपकी सारी कविताएं इस निराशाजनक समय में पॉजिटिव सोच की ओर ले जाती है। ये सारी कविताएं ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पाह पहुंचनी चाहिए। शानदार
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद प्रमोद ।
ReplyDeleteBahut hi sundar rachna sir.Sadar pranam
ReplyDeleteधन्यवाद, ख़ुश रहिये।
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