Thursday, June 11, 2020

सपना

                         सपना






धन-धान्य  से देश भरा है, 
हर तरफ खुशहाली है, 
हर कोई खुश अपने में है; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  

जाति-धर्म पर कोई न लड़ता, 
स्वार्थसिद्धि में कोई न पड़ता, 
सब मिल-जुल कर आपस में रहते; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  

फसलों से सब खेत भरे हैं, 
उच्च कोटि के बीज पड़े हैं, 
खेतों में सोना उगता है; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  

ऊँच-नीच की बात न कोई, 
बैर-भाव न रखता कोई, 
मेल-जोल की गंगा बहती; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  

सही समय पर शिक्षा मिलती, 
एक-एक को शिक्षा मिलती,
अब न कोई अशिक्षित है; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  

सबको ही रोजगार मिल रहा, 
उनकी शिक्षा के अनुसार, 
अब न कोई बेरोजगार यहाँ;
एक दिन मैंने सपना देखा|  

बच्चे कम अब परिवारों में, 
स्वस्थ और हैं मस्त घरों में, 
कोई न बचा कुपोषित है; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  

होली और ईद मनाते, 
त्योहारों पर मिलने जाते, 
आपस में न कोई लड़ाई; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  

सुख-दुःख में सब साथ में रहते, 
छोटे-बड़े का भाव न रखते, 
दुःख में अपनों के हाथ बटाते; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  

दादा-दादी,ताऊ-चाची, 
सब मिल एक आँगन में रहते, 
परिवारों में तैरती खुशियाँ; 
एक दिन मैंने सपना देखा| 
 
गाँव में ही रोजगार मिल रहा, 
दिल्ली,मुंबई कोई न जाता, 
बड़े न अब एकाकी रहते, 
अवसादों में कभी न पड़ते, 
चेहरे पर रहती मुस्कान; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  

बच्चे हरदम ही रहते 
अपने दादा-दादी के साथ, 
उन्हें कहानी कई सुनाते 
दादा बड़े चाव के साथ, 
जिनमें झलके जीवन दर्पण, 
जीवन जीने का दर्शन, 
बच्चे खूब मजे से सुनते 
उनकी छोटी-छोटी बात; 
एक दिन मैंने सपना देखा|  
 
काश! ये सपना सच हो जाता, 
आने वाले समय काल में; 
विपदा के दिन जल्दी बीते, 
सूर्य उगे फिर से खुशियों का, 
चीर सभी गम के अँधियार;
एक दिन मैंने सपना देखा-2 |  
 
                       रविशंकर उपाध्याय 

मौलिक कृति एवं 
सर्वाधिकार सुरक्षित | 




4 comments:

  1. आपकी सारी कविताएं इस निराशाजनक समय में पॉजिटिव सोच की ओर ले जाती है। ये सारी कविताएं ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पाह पहुंचनी चाहिए। शानदार

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  2. बहुत बहुत धन्यवाद प्रमोद ।

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  3. धन्यवाद, ख़ुश रहिये।

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