Sunday, July 5, 2020

पेड़

                                                    पेड़ 



प्रकृति में हलचल कोई, 
मौसम में परिवर्तन कोई, 
हर परिवर्तन के संकेतक हैं; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

जाड़ों में सब पत्ते खो कर, 
एकाकी में शांत भाव से, 
बिना किसी जुम्बिश के रहते; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

गर्मी में कर सुन्दर श्रृंगार, 
फूल,फलों व पत्तों से लद कर,
खड़े हुए हैं मुस्तैदी से; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

जैसे ही कोई बेचैनी, 
मौसम में कोई सरगर्मी, 
जोर-जोर से हिलते पत्ते;
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

जैसे वे संकेत कर रहे, 
उमस से निजात मिलेगी, 
खुश हो कर वे हमें बताते; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

वर्षा रानी आयेगी,
खूब पानी बरसायेगी, 
झूम-झूमकर हमें बताते; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

नाच रहे हैं ,झूम रहे हैं, 
मतवालों से घूम रहे हैं, 
जैसे सबके सुख में शामिल; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

तूफानों के आने पर, 
हलके से झुक जाते हैं,फिर 
पहले जैसे हो जाते हैं; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

अकड़ो मत दुनिया में तुम,
यदि अकड़े तो टूट गये; 
विनम्रता सबसे अच्छी है; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

गर्मी ,वर्षा या हो जाड़ा,
सबको सम भाव से जीना, 
सुख-दुःख केवल मन के भ्रम हैं;
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

फल से लद कर झुक जाते हैं, 
सुख में कभी घमण्ड न करना, 
सारे जग को सिखलाते हैं; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

शांत भाव से योगी जैसे, 
धुनी रमाये लगते वैसे, 
निर्विकार से खड़े हुए हैं;
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

जितने दिन का जीवन उनका, 
फल,फूल,लकड़ी,तिनका,
बस देना ही जाना है; 
पेड़ों की अपनी भाषा है| 

नहीं कोई सपने इनके, 
नहीं कोई महत्वाकांक्षा, 
जी भर जीये,चले गये; 
 पेड़ों की अपनी भाषा है| 

                               रविशंकर उपाध्याय
मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित       

7 comments:

  1. प्रकृति का बेहद सजीव चित्रण 👏👍

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  2. बहुत बहुत धन्यवाद ।

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  3. अलौकिक,,,, ध्यान ही नहीं गया कभी इस ओर,,
    वास्तव में वृक्ष परिवर्तन के बारे में बोहोत कुछ कहते है,,
    धन्यवाद अपने कविता द्वारा विषय पर अवगत कराने हेतु,,

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद ।

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. Bahot hi sahajta se pedo ki bhasha ko samjha diya aapne... bahot badhiya....

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