Wednesday, June 24, 2020

सावन

                               सावन


आग उगलती गरम हवाएँ, 
तन मन को भीतर तक झुलसाये, 
जीवन ब्याकुल गर्मी से था, 
सब लोगों को राहत पहुँचाने, 
मन भावन सावन के दिन आये|     

चिड़ियाँ चहक रहीं पेड़ों पर, 
अपना-अपना झुण्ड बनाये, 
नाच रही हैं कूद रही हैं,
तरह-तरह के खेल दिखायें; 
मन भावन सावन के दिन आये|     

आसमान में अपनों के संग, 
दूर क्षितिज तक नाप रही हैं; 
चलते लू से मिली है राहत, 
चिड़ियों के अच्छे दिन आये; 
मन भावन सावन के दिन आये|     

धरती जल मय लगती हैअब,
रोम-रोम उसके पुलके हैं; 
चटकी थी गर्मी से जो, 
उन फाँकों में पानी भरआये; 
मन भावन सावन के दिन आये|     

पवन हिलोरे ले ले नाचे, 
ठंडी-ठंडी लहर सी लागे,
झूम उठे मन हर प्राणी का, 
अंदर की गर्मी मिट जाये; 
मन भावन सावन के दिन आये|     

सूख गए थे ताल-पोखरे, 
सब में अब पानी भर आये; 
जल ही जल दिखता हैअब तो, 
दिन भर उसमें मेढक टर्राये; 
मन भावन सावन के दिन आये|     

झूले पड़ गए पेड़ों पर,
कजरी,चैता सब मिल गायें; 
झूल रही हैं बहू बेटियाँ, 
पेंगे आसमान तक जायें; 
मन भावन सावन के दिन आये|     

गीतों की मिठास मिल सबसे, 
प्रकृति में मिठास फैलाये; 
सारा जग ही झूम रहा है,
इन  गीतों से ताल मिलाये; 
मन भावन सावन के दिन आये|     

छोटे-छोटे कोपल निकले, 
पूरी धरती पर छा जायें; 
 उन पर पानी की बूँदें ज्यों, 
 मोती की लड़ियाँ बिखरायें; 
मन भावन सावन के दिन आये| 
    
गाँवों में खुशियाँ ही खुशियाँ, 
कृषक जा रहे खेतों में, 
अच्छी फसल के सपनें लेकर, 
दिल ही दिल में वह हरसाये;
मन भावन सावन के दिन आये|     

बाग,बगीचे,गाँव,शहर में, 
सबके अपने-अपने सुख हैं; 
 रहता सबको इंतजार है,  
बीते दुःख और खुशियों के दिन आये; 
मन भावन सावन के दिन आये|     

                         रविशंकर उपाध्याय 

मौलिक कृति एवं 
सर्वाधिकार सुरक्षित | 

    
 
 

6 comments:

  1. सावन के हर एक पहलू का विवरण।👍

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  2. धन्यवाद प्रमोद ।

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  3. Thing that I like about your poem is that every person can relate to it and understand very well...Good Poem!

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  4. आप की कलम कभी रुके ना ,,, अनवरत लिखते जाइए,,, अति सुन्दर,,,

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  5. बहुत बहुत धन्यवाद ।

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