Monday, June 22, 2020

काले बादल

                            काले बादल





काले बादल घिर-घिर आये, 
सारे आसमान में छाये, 
अच्छा बहुत किया तुमने; 
ऊब चुके थे गर्मी से हम, 
हम सबके चेहरे मुस्काये|  

काले-काले झुण्ड बना तुम, 
बिन मतलब नभ में मडराये; 
बनती-बिगड़ती सुन्दर छवियाँ
सब लोगों के मन हरसाये; 
हम सबके चेहरे मुस्काये|  


कोई तुममें दानव देखे, 
कोई भीमकाय मानव, 
कोई अपने देश का नक्शा, 
कोई प्रीतम की छवि देख लजाये; 
हम सबके चेहरे मुस्काये|  

ठंडी-ठंडी पवन राशि, 
सभी दिशाओं में लहराये, 
ऐसे भाग रहे हैं जैसे, 
नठखटपन पर सब दौड़ाये;  
हम सबके चेहरे मुस्काये|  

रिमझिम-रिमझिम बरस रही, 
बूंदों की संगीतमयी रागों में, 
स्वर इतने मिल रहे आज हैं, 
जैसे सबने मिल साज लगाये;
हम सबके चेहरे मुस्काये|  

सोंधी-सोंधी गंध धरा की, 
मन के कोनों में छा जाये, 
चित चकोर बेसुध होकर, 
अपनी चकई की आस लगाये; 
हम सबके चेहरे मुस्काये|  

जल का ही विस्तार दिख रहा, 
नज़रों के विस्तार पटल तक; 
बीते दिन अब तीखी गर्मी के, 
वर्षा के मनभावन दिन आये; 
हम सबके चेहरे मुस्काये|  

बीजों से नव अंकुर फूटे, 
चीर धरा का अंतस्थल; 
 हरियाली हर तरफ दिख रही, 
मन मयूर अब नृत्य दिखाये; 
हम सबके चेहरे मुस्काये|  

प्रकृति हरीतिमा के वसन ओढ़, 
गज गामिनी सी बल खाये; 
झूम रही है आनंदमयी हो, 
चहुँ ओर खुशियाँ बिखराये; 
हम सबके चेहरे मुस्काये| 
 
तेरे आने से हे बादल, 
जैसे धरती का कण-कण मुस्काये; 
वैसे हम भी इस वायरस से 
जल्दी से छुटकारा पायें; 
हम सबके चेहरे मुस्काये|  

                             रविशंकर उपाध्याय 

मौलिक कृति एवं 
सर्वाधिकार सुरक्षित | 

5 comments:

  1. monsoon ka bahot hi badhiya viviran... it is very detailed... you have noticed very small things and given them words...Kudos...

    ReplyDelete
  2. Thanks Ankit for this +ve reinforcement .

    ReplyDelete
  3. Wow sir .....bahut hi khoobsurat poem h👌👌👌

    ReplyDelete