Saturday, June 20, 2020

पिता



                        पिता 

Happy Father's Day to all dads - The Sunday Guardian Live



तिनका-तिनका चुनता, 
सहेजता,सम्हालता,
अपनों के लिए घरौंदा बनाता,
चिलचिलाती धूप,वर्षा,
कड़कड़ाती ठण्ड सहता, 
बचता-बचाता अपनों के लिये कमाता, 
पसीने से तर-बतर,
हलकान सा हुआ जाता, 
अपनों के लिये हर दर्द सहता, 
पिता|

बड़े-बड़े दुःख के थपेड़े,
अकेले ही चुपचाप सह जाता,
अपनों की ख़ुशी में,
अंदर ही अंदर खुश हो लेता, 
भावनाओं के उठते उत्ताप हिलोरों को 
जब्त कर लेता; 
उनको बाहर न आने देता; 
पिता| 

बच्चों की उँगली थामे, 
उन्हें दुनिया की ठोकरों से बचाता, 
दुनियादारी सिखाता,
उनकी उँगली पकड़े हम बच्चे, 
अपने को दुनिया के सबसे 
भाग्यशाली और खुश नसीब मानते 
और हमारी इस ख़ुशी पर, 
मंद-मंद मुस्कराता; 
पिता|  

हमें हर दम ख़ुशी और आनंद का 
आभास कराता; 
दुःख की छाया भी हम पर न पड़े, 
के प्रयास में हरदम 
कर्मरत रहता; 
बाहर से आने पर 
हमारे लिए कुछ न कुछ लाता, 
हमें हतप्रत कर देता; 
पिता| 

ढलती उम्र में भी 
अपनों के लिए उनका प्यार, 
उनका सर्वस्व समर्पण,त्याग,
दिन ब दिन बढ़ता गया; 
हम उनकी छाँव में 
फलते-फूलते रहे, 
बिना इस एहसास के 
कि,
अब कमजोर हो रहे हैं 
पिता| 

फिर भी उनका होना, 
हमें सम्बल देता रहा; 
बूढ़े बरगद के नीचे की 
ठंडी हवा हमें रोमांचित 
कर जाती थी तब भी; 
लेकिन,
एक दिन ढह गया, 
वह बरगद का पेड़ 
या कि पिता| 

खाली-खाली सा लगता था, 
मन भारी-भारी सा लगता था,
उस जगह को देख कर 
जहाँ से उखड़ा था, 
वह बरगद का पेड़; 
या कि पिता| 

क्रूर समय ने हमें 
जिंदगी के थपेड़ों में ऐसे 
ढकेल दिया कि, 
अब कभी कभी ही
 याद आती है उनकी; 
लेकिन, 
जब आती है, 
बड़ी सिद्दत से आती है, 
समय जैसे रुक जाता है; 
हम उन्हीं स्मृतियों में खो जाते हैं, 
जहाँ वे हमारी उँगली थामे, 
हमारी तोतली बातें सुन रहे हैं, 
और हम उनकी मुलायम,मोटी ,
उँगलियों को कस कर पकड़े; 
अपने को दुनिया का सबसे भाग्य शाली 
बच्चे समझते हुए, 
पग से पग मिलाने का प्रयास करते, 
कुछ कुछ दौड़ने से लगते, 
और कभी वे अपनी रफ़्तार 
कम कर देते और हम 
जीत जाते और हमारी जीत पर 
मंद-मंद मुस्कराते, 
पिता-2 | 
                       
                 रविशंकर उपाध्याय 

मौलिक कृति एवं 
सर्वाधिकार सुरक्षित | 




14 comments:

  1. Maa k lie sab likhte hai pita k lie koi koi hi Likhta hai🙏 Very good one on occasion of Father’s Day. Happy Father’s Day 🙏

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  3. सुन्दर,,। अति सुन्दर ,,,, आप की कविता,,,


    पर अपवाद भी है,,,,

    जैसे मै हूं,,


    व्यंग नहीं,, वास्तविकता,,



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  4. मुझे तो लगता है कि आप सबसे अच्छे पिता होंगे ।बहुत बहुत धन्यवाद ।

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  6. This is so true... seldom mentioned...Good One!

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  7. Bahut sundar atmabhivyakti ki prastuti....aapke swabhav & vyaktitwa ke anusar....

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