गेलवान में आगे बढ़ कर,
तुमने जो दुःसाहस की है;
उसका समुचित प्रतिउत्तर देकर,
हमने तुमको दिखा दिया है;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
फ़क्र हमें है अपने वीरों पर,
उनके अदम्य पराक्रम पर,
उनकी शहादत व्यर्थ न होगी,
जीवनभर तुम पछताओगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
तुमने कायरता से मारा,
हमने सीधे ललकारा है,
शेरों से गलती से भिड़ गये,
एक के बदले दस पाओगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
ये आज का सम्बृद्ध तथा
संसाधन से युक्त है भारत;
आँखे यदि दिखलायी तो,
पूरे अंधे हो जाओगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
बदल गया है देश हमारा,
पूरी दुनिया में डंका है,
दुम दबा के भागोगे;
यदि फिर से आगे आओगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
तुमको कोई शक है जैसे;
तुम रण में जीत जाओगे,
दिवास्वप्न मत देखो कोई,
चारो खाने चित्त मिलोगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
पहले हम हमला न करेंगे,
बाद में हम पीछे न हटेंगे,
तुमने हमको ललकारा है,
अब देखो तुम पछताओगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
देश तुम्हारा टूट चुका है,
अर्थव्यवस्था धसक गयी है,
खिसियान बिलरिया खम्भा नोचे,
अपना मुँह तुम नुचवाओगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
गीदड़ भभकी हमें न देना,
हम घर में घुस कर मारेंगे,
हर सीमा पर घिरे हुए हो,
हमसे जीत नहीं पाओगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
देश हमारा जाग गया है,
तुमको तहस-नहस कर देंगे,
हर मोर्चे पर तुम हारोगे,
सड़कों पर खुद को पाओगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
युद्ध नहीं हल होता कोई;
लेकिन यदि तुमने छेड़ा,
ऐसी दुर्गति कर देंगे ,कि खुद को
दुनिया के नक़्शे से बाहर पाओगे;
हर दम तुम मुँह की खाओगे|
रविशंकर उपाध्याय
मौलिक कृति एवं
सर्वाधिकार सुरक्षित |
Bahut badhiya. Apne her Hindustani k jazbaton ko Apne shabdo me piroya hai🙏
ReplyDeleteNice...Vande Mataram!
ReplyDeleteThank you Ankit.
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