कविता
कविता
कविता;
कवि मन की सरिता;
मन की संवेदनशीलता का सार;
दिल की विह्वलता का रजतहार ;
स्वर्गिक सुंदरता का स्वर्णधार;
कोयल के कलरव का कंठहार;
उगते सूरज का स्वर्णसार;
गोधूलि बेला की गरिमा का सार;
युवजन के कोमल सपनों का
स्वर्णिम संसार;
पर्वत और समंदर की हरितक्रांति की
संगीतमयी सुंदरता का आभास;
मानव जीवन के
सुख -दुःख में
समभाव बने रहने का भाव;
कविता;
कवि मन की सरिता ...|| -2
स्वरचित एवं सर्वाधिकार सुरक्षित -रवि शंकर उपाध्याय |

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