Wednesday, December 24, 2025

                                     कविता 




                                 कविता 

कविता;

कवि  मन की सरिता;

मन की संवेदनशीलता का सार;

दिल की विह्वलता का रजतहार ;

स्वर्गिक सुंदरता का स्वर्णधार;

कोयल के कलरव का कंठहार; 

उगते सूरज का स्वर्णसार;

गोधूलि बेला की गरिमा का सार;

युवजन के कोमल सपनों का 

स्वर्णिम संसार; 

पर्वत और समंदर की हरितक्रांति की 

संगीतमयी सुंदरता का आभास;

मानव जीवन  के 

सुख -दुःख में 

समभाव बने रहने का भाव;

कविता;

कवि  मन की सरिता ...|| -2 

स्वरचित एवं सर्वाधिकार सुरक्षित -रवि शंकर उपाध्याय |  

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