Thursday, December 18, 2025

                               वृद्धाश्रम से  पिता 


  वृद्धाश्र से पिता

अभी अभी गया है बेटा 

बाप से मिल कर ,

वृद्धाश्रम से !

आँखें फिर से गड़ाये रखेगा 

इन्तजार में !

जाने कब फिर आएगा वह 

बाप से मिलने ,

समय निकाल कर,

बीबी-बच्चों से बचकर |   

क्योंकि ,

उन्हें कभी  समझ नहीं आता 

बूढ़े के लिए बेटे  का प्यार !

बाप ने जो किया, 

उसकी जिम्मेदारी थी; 

फिर इसमें नया क्या किया ?

पैदा किया था, 

तो पालना ही था ;

अच्छी शिक्षा , सारी सुख -सुविधा 

देना ही था ;

भले ही खुद हमेशा 

परेशानियों  में जिया ;

इसमें नया क्या किया ?

ऊँगली पकड़ चलना सिखाया ,

बेटे  को अच्छा मिले ,

के लिए ;

वह अपने सपने लिए ;

ताउम्र तरसता रहा 

जीने के लिए !

बेटे का सप्ताह से महीने ,

और बरस में 

आते रहने का क्रम 

कभी भी टूट सकता है | 

क्योंकि ,

बाप- बेटे को जोड़ता यह भ्रम 

कभी भी टूट सकता है || -2  

स्वरचित एवं सर्वाधिकार सुरक्षित -रवि शंकर उपाध्याय  



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