Sunday, December 20, 2020

समय नहीं है

                              समय नहीं है  






समय नहीं है,

कि; 

रात में चाँद और तारों की 

शीतलता और सुंदरता;

रातरानी की मादकता;

जुगुनुओं की टिम-टिम;

उल्लुओं की चमकती आँखों;

झींगुरों की अनवरत 

ध्वनि तरंगों की लयबद्धता;

और,

सन्नाटे को चीरती 

पत्तों की सरसराहट के 

बीत राग को महसूस करें| 


भूत के गम,

भविष्य की चिंता;

सुबह से शाम,

बस काम ही काम;

दाल-रोटी की मशक्क़त में,

आदमी खो गया है!

प्रकृति का सानिध्य,

अपनापन और माधुर्य,

प्यार,दुलार और मनुहार जैसे शब्द 

कहीं नहीं हैं!

क्योंकि;

आदमी के पास,

इनके लिए समय नही है!-2 

            रवि शंकर उपाध्याय

मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित |   



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