समय नहीं है
समय नहीं है,
कि;
रात में चाँद और तारों की
शीतलता और सुंदरता;
रातरानी की मादकता;
जुगुनुओं की टिम-टिम;
उल्लुओं की चमकती आँखों;
झींगुरों की अनवरत
ध्वनि तरंगों की लयबद्धता;
और,
सन्नाटे को चीरती
पत्तों की सरसराहट के
बीत राग को महसूस करें|
भूत के गम,
भविष्य की चिंता;
सुबह से शाम,
बस काम ही काम;
दाल-रोटी की मशक्क़त में,
आदमी खो गया है!
प्रकृति का सानिध्य,
अपनापन और माधुर्य,
प्यार,दुलार और मनुहार जैसे शब्द
कहीं नहीं हैं!
क्योंकि;
आदमी के पास,
इनके लिए समय नही है!-2
रवि शंकर उपाध्याय
मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित |

उत्कृष्ट रचना👌
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद ।
ReplyDeleteDaal roti ki mashakkat me ,,, ?
ReplyDeleteAti Sundar rachna
बहुत बहुत धन्यवाद अविनाश।
ReplyDeleteBilkul sahi bat aur Bahut sunder shabdo me 🙏👌
ReplyDeleteThanks Archana .
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