Sunday, December 13, 2020

भ्रष्टाचार

                         भ्रष्टाचार







भ्रष्ट मंत्री,भ्रष्ट संत्री, 

भ्रष्ट लोग बाग हैं|  

भ्रष्ट साहब,भ्रष्ट बाबू ,

भ्रष्ट सभी आम हैं|  

भ्रष्ट सारी सोच सबकी; 

भ्रष्ट सारे काम हैं; 

भ्रष्ट गुरु,भ्रष्ट चेला, 

भ्रष्ट बड़े नाम हैं; 

भ्रष्ट नौकर,भ्रष्ट मालिक, 

भ्रष्ट पंडित,भ्रष्ट मुल्ला, 

भ्रष्ट नगर और मोहल्ला|  


भ्रष्टता चहक रही,चमक रही, 

चसक बनी सरक रही; 

गाँव,घर बहक रही; 

हवा में घुल महक रही; 

यहाँ,वहाँ,कहाँ नहीं ?

नजर से अब परे नहीं; 

न रात-दिन का फेर अब, 

सभी जगह वही वही !


सुधी सभी तड़प रहे, 

दीन बन दहक रहे; 

ज़मीर जार हो रही; 

इधर-उधर भटक रही; 

आर्तनाद कर रहा; 

गली-गली पसर रहा; 

भूख से तड़प रहा, 

आज पूरा देश है|  


उठो सभी!उठो सभी! 

उखाड़ फ़ेंक दें अभी, 

भ्रष्ट हों जहाँ कहीं; 

न उनको लेने चैन दें; 

समाज को जगा दें; 

सही लोकपाल दें; 

देश को सवाँर दें; 

नेक,नियत,सत्यता, 

और सच्चे बैन दें; 

बच्चे,बूढ़े और सबको; 

चैन भरी रैन दें | |-2 

             रवि शंकर उपाध्याय

मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित |   

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