Sunday, October 11, 2020

आज का युवा

                                             आज का युवा  


कोरे सपनों के बाहु पाश में, 

हर दम जकड़ा; 

मादक द्रव्यों के दल-दल में, 

नख शिख डूबा; 

आज का युवा|  

अंधकार में भटक रहा है, 

देश का सपना चटक रहा है, 

गांजा,चरस की लत में डूबा; 

आज का युवा |   

देश की रीढ़ की हड्डी खिसकी, 

अर्थ व्यवस्था की हालत सरकी, 

दारू की बोतल में डूबा; 

आज का युवा |  

माँ-बापू का सपना टूटा, 

बुढ़ापे का डण्डा छूटा, 

उनका भावी पंक में डूबा; 

आज का युवा |   

बड़े-बड़ेअभिनेत्री,अभिनेता, 

नशे की लत में डूब रहे हैं, 

मूल्यों का गुब्बारा फूटा; 

आज का युवा |   

बेरोजगार उपेक्षित सब हैं, 

भ्रष्टाचार के नरक में फँसकर, 

गम व अवसादों में डूबा; 

आज का युवा |   

बड़ी-बड़ी बातों का हौआ, 

मन की बातों का काला कौआ, 

बेमन ढोनें को मजबूर हुआ; 

आज का युवा |   

उम्र के साथ जिम्मेदारी बढ़ती, 

उसका बोझ उठाना मुश्किल, 

ऐसे कितने गम में डूबा; 

आज का युवा |   

लाखों की नौकरियाँ छूटी, 

कोरोना की विपदा टूटी, 

इस विपदा  से हलकान हुआ; 

आज का युवा |   

अंधकारमय भविष्य देखकर, 

गम से किंकर्त्तब्यविमूढ़ हुआ, 

तरह-तरह के नशे में डूबा, 

आज का युवा |   

 गम,दुःख आदि की आँधी आयी, 

उसमें सारा देश ही डूबा, 

मादक द्रव्यों की शरण में पहुँचा;

आज का युवा |  

मन से  टूटा, तन से टूटा,

 सम्बन्धों से नाता छूटा, 

कोरे सपनों की लाश को ढोता! 

आज का युवा |   

मैंने दिवा स्वप्न देखा! 

नशे की लत से निजात मिली; 

हृष्ट-पुष्ट खुशहाल हुआ! 

आज का युवा |   

अब सपना साकार हो सका,

 अवसादों से त्राण मिला, 

अंधकार से प्रकाश में लौटा, 

आज का युवा |   

प्रगति की पटरी टूट गयी थी, 

टूटी पटरी फिर से सुधरी! 

मुख्य धारा में खुश हो लौटा! 

आज का युवा-2 | 

                रवि शंकर उपाध्याय 

मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित |   





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