शिक्षक
क्या सोचा था? क्या कर देंगे?
जीवन अपना धन्य करेंगे,
बच्चों में जीवन मूल्य भरेंगे,
राष्ट्र-प्रेम की चाह भरेंगे,
अपने जीवन का दृष्टान्त बता,
उनमें अच्छे गुण भर देंगे;
कथनी-करनी की दीवार गिरा,
उनको सतपथ पर कर देंगे;
जाति ,वर्ण तथा धर्म की,
सच्ची परिभाषा देकर,
उनको सच्चा इंसान बना कर,
अपना नैतिक कर्म करेंगे;
अपनी तथा देश का अपने
आन,मान और शान बढ़ा कर,
विश्व पटल पर छा जायें,
ऐसी उनको शिक्षा देंगे;
अपने खून पसीने से अर्जित,
पदवी,रुतबा,ऊँचे सपने,
सब उनकी नन्ही आँखों में भर देंगे|
भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ गया,
अब तक का अपना सपना,
न वैसा परिवेश मिल रहा,
और नहीं वैसा सब कुछ,
अभिभावक को मतलब है,
बस भोजन,कपड़े,पैसे कुछ;
नाम लिखा देंगे बच्चे का
विद्यालय में ,फिर
क्या करता है? क्या पढ़ता है ?
कभी नहीं उनको मतलब !
अधिकारी को गुणवत्ता से,
प्रतिनिधियों को अव्यवस्था से,
गुरुजन को आपस की खींचातानी से,
मतलब है बस इतना ही है मतलब !
बहुतों को तो देर हो चुकी,
हम तो अब जागें यारों;
अपने सपनें खोने से पहले,
उनको पा लें यारों;
अंत-काल आने से पहले,
पिछला कुछ अच्छा सोचें,
ऐसी सुखमय,कर्तव्यनिष्ठ,
गौरवदायी,राष्ट्रोन्नति वाली,
शिक्षण की स्मृतियों की,
निधि पा लें यारों -2 |
रविशंकर उपाध्याय
मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित |

शिक्षक ही असली राष्ट्रनिर्माता है। जो देश शिक्षकों को सर्वोच्च पायदान पर रखे वहीं देश महान हो सकता है, वरना बाकी अपने यहां का तो पता ही है।
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद ।
DeleteOne of the best poem from you🙏
ReplyDeleteThanks alot.
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