Sunday, August 23, 2020

हवा

                       हवा












 जग में हाहाकार मचा है,

 हर प्राणी हलकान यहाँ है,

 सबको सुख-शांति पहुँचाने; 

   हवा तुम जल्दी आना |  


मग में तेरे उपवन होंगे, 

फूलों की सुंदरता से, 

सारे जग को हरसाना; 

हवा तुम जल्दी आना |  


हरश्रृंगार ,चमेली,बेला, 

इन फूलों से खुशबू लेना, 

जग को मह-मह महकाना; 

हवा तुम जल्दी आना |  


खुद का कर श्रृंगार इन्हीं से, 

हरियाली का वसन लपेटे, 

बल खाती  सी मद माती सी; 

हवा तुम जल्दी आना |  


देख तुम्हारे रूप राशि को, 

पीपल के पत्तों सा हिलता, 

मन का कोमल भाव सलोना; 

हवा तुम जल्दी आना |  


तेरे आने की आहट लें, 

संकेतों से तुम बतलाना, 

पत्ते,डाली खूब हिलाना; 

हवा तुम जल्दी आना |  


नदियाँ,ताल,पोखरे तक, 

लहरा-लहरा कर हमें बतायें, 

उनकी भाषा में समझाना; 

हवा तुम जल्दी आना |  


दिल के भाव उमंगों में भर, 

मन ही मन मुस्कायें, 

ऐसी कोई बूटी लाना; 

हवा तुम जल्दी आना |  


भावों में संवेदना बचे, 

रूखे रिश्तों के घाव भरे, 

ऐसी कोई सूरत लाना; 

हवा तुम जल्दी आना |  


जग सूना है,प्राण हीन है, 

सारे प्राणी भाव हीन हैं, 

इनको प्राण-वायु दे जाना; 

हवा तुम जल्दी आना |  


विपदाओं से परेशान सब,

पड़ जायें बिस्तर पर जब, 

तुम इनको चँवर डुलाना; 

हवा तुम जल्दी आना |  


देर न करना हे सुन्दरी !

जग प्रसन्न हो जाये सारा, 

ऐसी खुशहाली फैलाना; 

हवा तुम जल्दी आना -2 | 

                      रविशंकर उपाध्याय

मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित |   

  

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