हवा
जग में हाहाकार मचा है,
हर प्राणी हलकान यहाँ है,
सबको सुख-शांति पहुँचाने;
हवा तुम जल्दी आना |
मग में तेरे उपवन होंगे,
फूलों की सुंदरता से,
सारे जग को हरसाना;
हवा तुम जल्दी आना |
हरश्रृंगार ,चमेली,बेला,
इन फूलों से खुशबू लेना,
जग को मह-मह महकाना;
हवा तुम जल्दी आना |
खुद का कर श्रृंगार इन्हीं से,
हरियाली का वसन लपेटे,
बल खाती सी मद माती सी;
हवा तुम जल्दी आना |
देख तुम्हारे रूप राशि को,
पीपल के पत्तों सा हिलता,
मन का कोमल भाव सलोना;
हवा तुम जल्दी आना |
तेरे आने की आहट लें,
संकेतों से तुम बतलाना,
पत्ते,डाली खूब हिलाना;
हवा तुम जल्दी आना |
नदियाँ,ताल,पोखरे तक,
लहरा-लहरा कर हमें बतायें,
उनकी भाषा में समझाना;
हवा तुम जल्दी आना |
दिल के भाव उमंगों में भर,
मन ही मन मुस्कायें,
ऐसी कोई बूटी लाना;
हवा तुम जल्दी आना |
भावों में संवेदना बचे,
रूखे रिश्तों के घाव भरे,
ऐसी कोई सूरत लाना;
हवा तुम जल्दी आना |
जग सूना है,प्राण हीन है,
सारे प्राणी भाव हीन हैं,
इनको प्राण-वायु दे जाना;
हवा तुम जल्दी आना |
विपदाओं से परेशान सब,
पड़ जायें बिस्तर पर जब,
तुम इनको चँवर डुलाना;
हवा तुम जल्दी आना |
देर न करना हे सुन्दरी !
जग प्रसन्न हो जाये सारा,
ऐसी खुशहाली फैलाना;
हवा तुम जल्दी आना -2 |
रविशंकर उपाध्याय
मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित |

अतिसुंदर
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद ।
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