प्यार आजकल
पहली नज़र में भा गये,
दिल में उसके छा गये,
दिल ज़ोर से धड़क उठा;
यही है प्यार आजकल!
न उससे कुछ पूछा कभी;
न उसकी राय ही लिया!
खुद ही सब निर्णय लिया!
यही है प्यार आजकल!
सारे काम-धाम छूटे;
अपने सारे उससे रूठे;
उसने न परवाह किया;
यही है प्यार आजकल!
उसने सब जतन किया,
जिससे उसकी वह बने;
उसका प्रयास व्यर्थ रहा;
यही है प्यार आजकल!
अब वह गुस्से में हुआ,
इधर-उधर फिर रहा;
दिल में द्वेष पल रहा;
यही है प्यार आजकल!
अगर वह मेरी न हुई;
किसी और की न होने देंगे;
यही विचार पल रहा;
यही है प्यार आजकल!
चेहरे पर गुमान उसे;
न चेहरा सुन्दर रहने देंगे!
रात-दिन वह सोच रहा;
यही है प्यार आजकल!
उसको कुछ पता नहीं,
वह पीछे उसके लग लिया;
चेहरा उसका झुलस दिया!
यही है प्यार आजकल!
वह दर्द से तड़प रही;
तमाशबीन जुट गये!
सबने वीडियो बनाया!
यही है प्यार आजकल!
बाद में पकड़ा गया वह;
अब जेल में पड़े हुये,
पश्चाताप कर रहा;
यही है प्यार आजकल!
उसकी तो जिंदगी ख़राब!
झुलसा हुआ चेहरा लिये,
प्रारब्ध को है कोस रही!
यही है प्यार आजकल!
प्यार जैसी भावना भी
फूट-फूट रो रही;
न उसका अब भविष्य कोई!
क्या हो रहा है आजकल?-2
रवि शंकर उपाध्याय
मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित|

True explanation..
ReplyDeleteThanks.
ReplyDeleteबहुत शानदार शब्द संयोजन
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