Friday, December 31, 2021

नव वर्ष














सूर्य रश्मि की  दस्तक संग,  
नव किरणों के नव गुम्फन संग, 
अगणित तारों  के जाते-जाते,
सुमधुर प्रफुल्लित चिड़ियों सी, 
कलरव करती अगणित किरणों संग; 
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 

सब अपने सपनों  को साधे, 
नव जीवन की घुट्टी पीकर,
मधुर मनोहर जीवन पथ पर,
सब अपने वैभव को पा लें;  
सारी दुनिया खुशहालीमय हो; 
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 

सुख-दुख आते-जाते हैं; 
स्वास्थ्य लाभ हर मानस का हो; 
धन के पीछे भागती दुनिया, 
मानवता के पीछे भागे;
मानव धर्म सभी अपनायें; 
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 

जाति,धर्म की कारा टूटे; 
वर्ण आदि की माया रूठे; 
सब मिल मानव धर्म निभायें;  
आपस में भाई-चारा हो; 
सब कुछ  प्यारा-प्यारा हो; 
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 


रोगों  से निजात मिले; 
ओमीक्राँन का भय न सताये; 
जल्दी ही इसका हल निकले;
सबको स्वास्थ्य लाभ मिले;
निरोगी सारी दुनिया हो;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 


प्रकृति का उतना ही दोहन हो; 
जितने की हो हमें जरुरत;
महत्वाकांक्षा की बलिवेदी पर,
अपने मूल्य बलिदान न हों; 
प्रकृति का तांडव फिर न बरपे;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 

आर्थिक मन्दी की इस कठिन गली से,
हम सारे सकुशल लौटें;
सबको मन चाही  नौकरी मिले;
उनके चेहरे पर मुस्कान खिले;
घर आँगन में खुशियाँ लौटे; 
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 

दुनिया के हर गांव  की गलियाँ, 
फुलों के सुगन्ध से महके; 
सुख की नदियाँ  कल कल करती, 
हर घर आँगन में आकर, 
हर घर में  खुशियाँ लाये;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 

सोच बड़ी हो हर मानव की;  
सबमें अपनापन बिखरे; 
तुच्छ  स्वार्थ के वशीभूत हो,
मानवता का धर्म न भूलें; 
वसुधैव कुटुम्बकम् फलीभूत हो; 
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 

आती-जाती साँसों  संग,  
प्रतिपल-प्रतिक्षण  जीते जी; 
जीवन की अविरल गंगा में,  
परहित  ही हो धर्म  सदा; 
मानवता की सदा विजय हो; 
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 

अपनी मूल्यवान संस्कृति;  
और उसकी  सम्बृद्ध  परम्परा,
नव किरणों से उर्जित हो कर
जन मानस में फिर से फैले; 
विश्व गुरु फिर से हम हों; 
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो| 


मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित | 
                                रवि शंकर उपाध्याय