सूर्य रश्मि की दस्तक संग,
नव किरणों के नव गुम्फन संग,
अगणित तारों के जाते-जाते,
सुमधुर प्रफुल्लित चिड़ियों सी,
कलरव करती अगणित किरणों संग;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
सब अपने सपनों को साधे,
नव जीवन की घुट्टी पीकर,
मधुर मनोहर जीवन पथ पर,
सब अपने वैभव को पा लें;
सारी दुनिया खुशहालीमय हो;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
सुख-दुख आते-जाते हैं;
स्वास्थ्य लाभ हर मानस का हो;
धन के पीछे भागती दुनिया,
मानवता के पीछे भागे;
मानव धर्म सभी अपनायें;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
जाति,धर्म की कारा टूटे;
वर्ण आदि की माया रूठे;
सब मिल मानव धर्म निभायें;
आपस में भाई-चारा हो;
सब कुछ प्यारा-प्यारा हो;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
रोगों से निजात मिले;
ओमीक्राँन का भय न सताये;
जल्दी ही इसका हल निकले;
सबको स्वास्थ्य लाभ मिले;
निरोगी सारी दुनिया हो;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
प्रकृति का उतना ही दोहन हो;
जितने की हो हमें जरुरत;
महत्वाकांक्षा की बलिवेदी पर,
अपने मूल्य बलिदान न हों;
प्रकृति का तांडव फिर न बरपे;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
आर्थिक मन्दी की इस कठिन गली से,
हम सारे सकुशल लौटें;
सबको मन चाही नौकरी मिले;
उनके चेहरे पर मुस्कान खिले;
घर आँगन में खुशियाँ लौटे;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
दुनिया के हर गांव की गलियाँ,
फुलों के सुगन्ध से महके;
सुख की नदियाँ कल कल करती,
हर घर आँगन में आकर,
हर घर में खुशियाँ लाये;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
सोच बड़ी हो हर मानव की;
सबमें अपनापन बिखरे;
तुच्छ स्वार्थ के वशीभूत हो,
मानवता का धर्म न भूलें;
वसुधैव कुटुम्बकम् फलीभूत हो;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
आती-जाती साँसों संग,
प्रतिपल-प्रतिक्षण जीते जी;
जीवन की अविरल गंगा में,
परहित ही हो धर्म सदा;
मानवता की सदा विजय हो;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
अपनी मूल्यवान संस्कृति;
और उसकी सम्बृद्ध परम्परा,
नव किरणों से उर्जित हो कर
जन मानस में फिर से फैले;
विश्व गुरु फिर से हम हों;
नव वर्ष सबका मङ्गल मय हो|
मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित |
रवि शंकर उपाध्याय